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f:2130 -    जुराबों पर मसह का आदेश
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Question:     मुफती साहब! मैं पायतावों पर मसह (पोछना) करने से संबंधित परिमित सा विस्तार जान्ना चाहता हुँ? मार्गदर्शन करें मेरी।
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Answer:     वुज़ू में दोनों पैरों को टखनों समेट एक बार धोना फर्ज़ है।  यदि कोई व्यक्ति वुज़ू करने के बाद पायतावे पहन ले तो इस के लिए पायतावे निकाल कर पैर धोने के बजाए केवल पायतावों पर एक बार मसह कर लेना काफी है।  

पैर धोने की अवश्यकता नहीं, पायतावों (जुराब) पर मसह करने की सीमा व समय “हदस घटित होने के समय से ” निवासी के लिए 1 दिन 1 रात तथा यात्री के लिए 3 दिन 3 रात है।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 31 में उल्लेख है।  

परन्तु ये बात उचित रूप से निश्चिंत रखनी चाहिए के जुराब से मुराद क्या है!  फुक़्हा किराम ने हदीसों के आधार पर फरमाया है केः-

(1)- जुराबें ऐसे हों जिस में पैर के टखने छिप जाएं परन्तु शर्त ये है के वह बिना बाँधे पैर पर जमे रहें।  

(2)- चाहे वह चमड़े के हों या किसी ऐसी चीज़ के जो मोटी हो तथा इस में पानी उतीर्ण ना करे।  

(3)- और ऐसे हो के मानव इस को पहन कर बिना तकलीफ आदत के अनुसार चल फिर सके।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, किताबुल तहारह, पः 32 में उल्लेख हैः-

यदि जुराब व पायतावा इतना फटा हुआ हो के चलने की स्थिति में पैर का बाग पैर की 3 छोटी अंगुलियों के संख्या में खुल जाता हो तो इस पर मसह जाइज़ नहीं।  प्रत्येक जुराब का मसह, हाथ की 3 छोटी अंगुलियों के समान जुराबें की पीठ पर होना चाहिए।  

जिन चीज़ों से वुज़ू टूटता है इन से मसह भी अनुचित व गलत हो जाता है इसी प्रकार जब समय पुरा हो जा या जुराब पैर से या पैर के अधिकतर भाग से उतर जाए तब भी मसह गलत होता है।  

साधारणतः जो पायतावे पहने जाते हैं वह इस प्रकार होते हैं के पानी इस में पार कर जाता है अर्थात जुराबों के आदेश में प्रवेश नहीं इसी लिए इस को पहन्ने की स्थिति में इन पर मसह करना श्रेष्ठ नहीं बल्कि इन्हें पैरों को धोना अवश्य है वरना वुज़ू ही पूरा नहीं होगा।  

यदि हदस घटित होने के समय से तैयम्मुम का समय व काल 1 दिन 1 रात सम्पूर्ण हो जाए तो जुराबों पर मसह करना, शरन जाइज़ नहीं इस के लिए अवश्य है के जुराबें निकाल कर पैर धो लें तथा यात्री का समय व काल 3 दिन 3 रात सम्पूर्ण होने पर भी यही आदेश रहेगा।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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