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فتاویٰ > व्यवसाय > किराये का वर्णन

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f:1941 -    किराये पर देते जब समयावधि का निश्चित करना अवश्य है
Country : करनूल, हिंदुस्तान,
Name : मुहम्मद हमीदुल्लाह
Question:     कुछ लोग दुकान के स्थान को किराये पर देते हैं, किरायेदार इस में दुकान खोलता है तथा अपनी मेहनत व परिश्रम तथा बड़ी कोशिशों से व्यापात करते हैं।  ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार व मामला करते हैं।  जब बाज़ार व मार्केट में वे दुकान नामवर होती है एवं लोग इस ओर मोह व आकर्षित हो जाते हैं तो दुकान के मालिक किसी भी प्रकार मलगी व दुकान खाली करवाते हैं एवं इसी दुकान में वही जमा-जमाया व्यापार खुद करने लगते हैं क्या मालिकों का ये कर्म श्रेष्ठ है।  क्या ये किरायेदारों के साथ कठोरता नहीं?
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Answer:     किसी भी वस्तु व चीज़ को किराये पर देने को इजारह कहते हैं।  ये मनुष्य की बुनियादी अवश्यकताओं से है।  इसलामी शरीअत में इस मामले के शर्तें निर्धारित किए गए हैं।  पूर्ण शर्तों में से एक शर्त ये है के इजारह (किराये पर देने) का समय निश्चित व नियुक्त किया जाए।  

जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 04, पः 114 पर उल्लेख है।  

मालिक को समय की भीतर खाली कराने का अधिकार नहीं परन्तु समय समाप्त होने के बाद अधिकार है के जब चाहे किरायेदार से मलगी व दुकान खाली कराले।  

किन्तु मालिक को मलगी व दुकान की अवश्यकता ना हो एवं किरायेदार निर्धन व ज़रूरतमंद हो तो इसलामी भाइचारगी के प्रति निर्धन की सहायता करनी चाहिए।  

इस सिलसिले में हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का धन्य आदेश हैः-

भाषांतरः हज़रत सालिम रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वर्णित करते हैं के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमायाः मुसलमान दूसरे मुसलमान का भाई है।  वह इस पर अत्याचार ना करे एवं ना इस को असहाय व निस्सहाय छोड़े तथा जो मुसलमान अपने भाई की अवश्यकता पूरी करने को कोशिश करता है अल्लाह तआला इस की अवश्यकता पूरी कर देता है एवं जो किसी मुसलमान के दोष व खोट को छिपाता है अल्लाह तआला क़ियामत के दिन इस की दोष छिपाता है।  

(सहीह मुसलिम, जिल्द 02, पः 320, हदीस संख्याः 6743)  

यदि दुकान व मलगी के मालिक को सचमुच व वास्तव में दुकान की आवश्यकता ना हो एवं किरायेदार ज़रूरतमंद व निर्धन भी हो तो इसलामी भाईचारगी व भ्रातृभाव की मांग ये है के अपने ज़रूरतमंद भाई की सहायता करें तथा अवश्यकता के समय इस का योगदान करें।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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