***** For other Fatawa, please click on the topics on the left *****



विषय की सूची

فتاویٰ > शिष्टाचार > पड़ोसियों के अधिकार

Share |
f:1345 -    अप्रसन्न संबंध का कारण- कठोरता व शत्रुता
Country : सिकंद्राबाद,
Name : ख्वाजा निज़ामुद्दीन
Question:     यदि परिवार में या मुहल्ले में किसी से संबंध अच्छे ना हों ऐसे व्यक्ति से कोई मामला करने का अवसर हो जबके हम सत्य पर हों, ऐसे समय इन के साथ हमारी ओर से कोई अधिकता हो जाए तो क्या अल्लाह के पास हमें उत्तर देना होगा?  इस प्रश्न का उत्तर अवश्य दें।
............................................................................
Answer:     किसी शरई़ कारण के बिना, किसी से संबंध अनिश्चित व संदिग्ध रखना बजाए खुद पाप है।  अर्थात मुसलमानों को ये आचरण प्राप्त नहीं करना चाहिए।  यदि इसलामी कारण से किसी के साथ संबंध ना हों तब भी संबंध की तलक़ी या किसी से नाराज़गी के कारण मामलेदारी में इस के साथ कठोरता व अधिकता में आज्ञा नहीं।  

न्याय व इन्साफ के मामले में इसलाम ने मित्र व विरोधी, मुसलमान व ग़ैर-मुस्लिम का भी अंतर नहीं रखता।  “इसलाम” विरोधियों के साथ भी न्याय व इन्साफ को अनिवार्य घोषित देता है ताकि इस की नीव पर एक अनुकूल व सुखी समाज रचना में आएं।  अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- किसी क़ौम व जाति की शत्रुता तुम्हें इस बात पर ना उभारे कि तुम इनसाफ़ करना छोड़ दो।  न्याय व इनसाफ़ करो, यही धर्मपरायणता से अधिक निकट है।  

(सुरह अल माइ़दाः 05:08)  

वास्तव में बिना किसी शरई कारण किसी ने आप से संबंध अप्रसन्न कर लिए हों एवं आप सत्य पर हों तब भी आप की ओर से संबंध तोड़ना या कठोरता करने वाला कर्म श्रेष्ठ नहीं।  नबी रहमत सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का धन्य आदेश हैः-

भाषांतरः- सुलह रहमी (कुशल व्यवहार) करने वाला वह नहीं जो प्रतिशोध लेने वाला हो बल्कि सुलह रहमी करने वाला वह है के जब नातेदारी तोड़ी जाए तो ये इसे जोड़े।  

(सहीह बुखारी, किताबुल अदब, हदीस संख्याः 5991)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
All Right Reserved 2009 - ziaislamic.com