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فتاویٰ > विश्वास > प्रकीर्ण मसाइल

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f:1266 -    SMS के द्वारा बैअ़त करने का आदेश
Country : भारत,
Name : मुद्दस्सिर
Question:     अस्सलामु अ़लैकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुह!  मुफती साहब!  मेरा प्रश्न ये हैं क्या हम SMS के द्वारा मुरीद (अनुयायी) बन सकते हैं?  मुरशिद को बिना देखे और जो हम से बहुत दूर हैं, और क्या किसी की ज़बर्दस्ती से बन सकते हैं?  कृपया उत्तर प्रदान करें।
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Answer:     वअ़लैकुम अस्सलाम वरहमतुल्लाहि वबरकातुह!  मुरीद बन्ना वासत्व में एक वचन व वादा करना है।  जिस में मुरीद अपनी बख्शिश के लिए मुरशिद (सलाहकार व परामर्शदाता) को अल्लाह के दरबार में वास्ता बना कर पूर्व पापों, सुन्नतों का विरुद्ध से तौबा करता है और भविष्य में इन कर्मों से दूर रहने का वचन लेता है।  प्राचीन ज़माने से ये कर्म हाथ पे हाथ रखने के साथ किया जाता है।  इसी लिए फुक़्हा किराम ने बैअ़त के लिए हाथ मिलाने को सुन्नत घोषित किया है।  जैसा के इ़माम फक़्र उद्दीन ज़ैलअ़ई़ हनफी रहमतुल्लाहि अलैह हाथ मिलाने से संबंधित ने तबई़न उल हखाइख में फरमाया हैं।  

हदीसों के आधार में हाथ मिलाना सहीह व उचित है और बैअ़त आदित के समय हाथ मिलाकर करना सुन्नत है जो प्राचीन ज़माने व दौर से जारी है।  अतः यदि शेख कामिल हो, शरीअ़त का पाबंद व पालन करने वाला हो, हाथ मिलाकर बैअ़त करने की सुविधा ना हो तो SMS के द्वारा भी बैअ़त की जा सकती है।  तथा शिक्षा व ज़िक्र लिए जा सकते हैं।  

बैअ़त करने से पूर्व जिन से बैअ़त की जा रही है इन के बारे में सम्पूर्ण रूप से निश्चिंत कर लेना चाहिए।  दिली लगाव व आकर्षण व स्नेह के लिए तो बैअ़त की जाए, किसी की ज़बर्दस्ती से बैअ़त करना श्रेष्ठ नहीं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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