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f:1177 -    ग़ैर मुसलिमों के साथ सामाजिक संबंध
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Question:     मुसलमानों को ग़ैर-मुसलिमों के साथ कैसा संबंध रखना चाहिए?
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Answer:     ग़ैर मुसलिमों के साथ सामाजिक संबंध

मुसलमानों का संबंध किसी भी धर्म व समुदाय के सदस्य से हो, इन्हें हर स्थिति में यह ध्यान रखना चाहिए के हम तो मुसलमान हैं, हमारी जीभ व वर्णन से कभी किसी को हानी ना पहुंचे पाय।  कियों के इसलाम ने ग़ैर मुसलिमों को साथ सामाजिक तथा सदाचरण (अभिप्राय व सात्विक) संबंध का अनुदेश कि है।  अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- अल्लाह तुम्हें इस्से नहीं रोकता कि तुम उन लोगो के साथ अच्छा व्यवहार करो तथा उनके साथ न्याय करो, जिन्हों ने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया तथा ना तुम्हें तुम्हारे अपने घरों से निकाला।  निस्संदेह अल्लाह न्याय करने वालों को पसन्द करता है।  

(सुरह अल मुमतहिनाः 60:08)

इस आयत में स्पष्ट तौर पर यह हिदायत दी गाई है के ग़ैर मुसलिमों से भी न्याय तथा इन्साफ का मामला, अच्छा व्यवहार तथा शिष्टाचार करना चाहिएः-

सत्य तो यह है के इसलाम के समुदाय चाहे इसलामी देशों में हों या लोकतान्त्रिक  (जनतन्त्रीय व प्रजातान्त्रिक) देशों में, हर स्थान पर मुहब्बत के सन्देश को आम करने, प्रेम के फूल बिखेरने वाले होते हैं, वह वार्तालाप व सभ्यचार के प्रति से शान्ति व सुरक्षा का पैकर होते हैं।  इसे मानवता कि अगुवा (नायक व समर्थक) के लिए ही अस्तित्व प्रदान किया है, जैसा के अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- तुम एक उत्तम सुमदाय हो, जो लोगों के समक्ष लाया गया है।  

(सुरह अल इ़मरानः 03: 110)

इस से संबंधित कंज़ुल उम्माल में हदीस हैः-

भाषांतरः- नबी करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम अनुदेश फरमाते हैः- सब से श्रेष्टतर मनुष्य वह है जो सम्पूर्ण मानवता को लाभ पहुंचाए।  

(कंज़ुल उम्माल, किताब उ़ल माई़शती वल अअ़दात, हदीस संख्याः 43065)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक/संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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