शहादत की घटना - हृदयवेदन वर्णन
लेखक: मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक/संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर
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>> शहादत की घटना – हृदयवेदक वर्णन
>> परिचय
>> शहीदों की सांसारिक आजीवन
>> हज़रत इमाम हुसै की पावन रौज़े (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) पर उपस्थिति और दुआ़
>> हज़रत इमाम का सपना और सरकार का आदेश
>> कूफा को रवानगी तथा मक्का वालों की सहानुभूति
>> करबला के मैदान में आगमन, और वहाँ की कठोरता
>> हज़रत इमाम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की करमात से विरोधियों को व्यक्तिपरक सजा
>> इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु के साथियों की युद्ध में आगमन
>> हज़रत अबदुल्लाह कल्बी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की जीवनदायी
>> अहले बैत की सिलसिले शहादत
>> हज़रत ज़ैद बिन अ़ली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत
>> हज़रत जअ़फर बिन अ़ली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत
>> हज़रत सैयदना खासिम रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत
>> हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की शहादत
>> हज़रत अ़ली अकबर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की शहादत
>> हज़रत अ़ली असग़र रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की शहादत
>> हज़रत शहरबानो का सपना
>> हज़रत इमाम हुसैन की पावन रौज़े (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) पर उपस्थिति और दुआ़

 
 
शहीदों की सांसारिक आजीवन

शहीदों की सांसारिक आजीवन

संसार में भी तो वे इस अनुसार से जीवित हैं के जिस कुशलता को इन्हों ने संसार में जान दे कर बहाया था वे कभी बंद ना होगा।  जिस वृप पर समर को इन्हों ने अपने खून से सींच-सींच कर उगाया था इस के फल व फूल उत्पन्न ना होंगे। 

अल्लाह के मार्ग में जान तो क्या एक बूंद खून बहाने वालों का जो स्थान है वे देखिए, अल्लाह तआ़ला सब से कलाम परदे की आड़ में करता है परन्तु शहीद जो अल्लाह के मार्ग में अपनी जान त्याग व बलिदान कर देते हैं उन से बेपरदा कलाम करता है। 

 

मुसनद इमाम अहमद में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु फरमाते हैं के रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने निर्देश कियाः जब तुम्हारे भाई उहुद के उहुद के युद्ध में शहीद हुए तो अल्लाह तआ़ला ने उन की राहों पर पक्षियों के पेट में (इस प्रकार रखा जिस प्रकार संसार में सवारी में सवार रहता है या हवाई जहाज में यात्री रहता है) वे जन्नत की नहरों पर उड़ते-फिरते हैं, जन्नत के फल खाते हैं तथा अ़र्श के साये में सुन्हरही दीपकों में बसेरा करते हैं।  पस जब इन को खाने पीने और सोने का स्वाद व आमोद प्राप्त हुआ ते कहने लगेः हमारे भाईयों को हमारी ये सूचना कौन पहुंचाएगा के हम जन्नत में जीवित हैं।  भोजन दिया जाता है ताके वे हमारे भाई जिहाद (संघर्ष) में विसंबंधन व लड़ाई में आलस्य से काम ना लें, इस पर अल्लाह तआ़ला ने आदेश फरमाया के उन को तुम्हारी सूचना मैं दुंगा, बस अल्लाह ने ये आयत प्रकट कीः भाषांतरः और जो अल्लाह के मार्ग में मारे गए हैं उन को मृतक व मरा हुआ विचार ना करना, बल्कि वे पालनहार के पास जीते (जागते उपस्थित हैं) (उस की कृपा से) उन को रोज़ी मिलती है। 

 

धर्म की हिमायत में जिन्हों ने अपना धन, अपनी जान त्याग व बलिदान की उन सब के मुखिया व सरदार हज़रत सैयदना अ़ला, सैयदना हज़रत इमाम हसन तथा सैयदना हज़तर इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुम हैं। 

 

उस समय की बात है के इधर हज़रत इमाम हसन तथा हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुमा को इसलाम धर्म के विनाश होने का दुःख था तो उधर अत्याचारों को ये विचार था के जब तक संसार में इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु तथा इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु रहेंगे हम इसलाम धर्म विनाश नहीं कर सकेंगे। 

 

इन लोगों के संसार से जाने के बाद ही हम इस धर्म की खराबी जैसे चाहें वैसे कर सकेंगे, इस लिए इन लोगों की शहादत के दर पे थे। 

 

शहीदों के जीवन से संबंधित पावन आयत के प्रति में अनिवार्य स्पष्टीकरण के बाद शहादत (स्वधर्मार्थ प्राण त्याग) की घटना वर्णन किए जा रहे हैं-

 

हज़रत सैयदना इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु के करबला तशरीफ ले जाने से पूर्व मदीने के

मदीने के राज्यपाल के नाम यज़ीद का आदेश पर आदेश आने लगा के जहाँ तक हो सके तुरंत हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से बैअ़त ली जाए। 

 

यदि वे मेरी बैअ़त (प्रतिज्ञा व वचन) को अस्वीकार कर दें तो इन का सर काट कर तुरंत मेरे पास रवाना कर दो।  मैं तुम्हे अधिक संबोधित करुँगा।  मदीने पाक के राज्यपाल हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु को बुला कर निवेदन किया के आप के हत्या संबंधित निर्देश चले आ रहे हैं।  आश्चर्यचकित हुं के क्या करुं।  कुछ उपाय नहीं सूझी। 

 

हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़लाअन्हु ने फरमायाः यज़ीद बिदअ़ती (प्रवर्तक) है, शराबी है।  इस के हाथ पर किस प्रकार बैअ़त करुँ।  साधारण मुसलमानों से सुझाव लिया जाए।  जो सब की अनुमति होगी इस से मुझ को विरोध नहीं। 

 

फिर यज़ीद का निर्देशन आदेश आया के बैअ़त या हत्या।  दोनों से एक तुरंत होना चाहिए।  मदीने के राज्यपाल नेक नफ्स (भला मनुष्य) था।  इस ने हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु को इस की भी सूचना दी।





 
 
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