ज्ञान - उत्तमता व महत्व
लेखक: हज़रत मौलाना मुफती हाफिज़ सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,- महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया, प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर
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परिचय

 परिचय

 

शव्वाल के मास में क्यों के धार्मिक संस्था व मदरसों के नय शैक्षिक वर्ष का प्रारंभ होता है। 

 

शिक्षा हर बुलंदी का सोपान तथा हर प्रगति का माध्यम है।  हर अवधि में वही समुदाय तथा वही जमात सफल रही जिस ने अपने को शिक्षा से संबोधित रखा। 

 

वास्तव में ज़ाहिरी उन्नति तथा बातिनी प्रगति ज्ञान ही से संबंधित है।  शिक्षा से खूद ज्ञन प्राप्त करने वाला उन्नति करता है तथा समाज के लिए विकास की राहें खुलती हैं। 

 

शिक्षा के द्वारा मानव प्रगति व विकास कि मंज़िलें तय करता हुआ सर्वोत्तम नक्षत्र पर पहुंचता है शिक्षा के द्वारा हर क्षेत्र में प्रशंसा करता है वायुयान व बाण हवाई की ज़ाहिरी स्तर (उँचाई) भी शिक्षा के बिना नहीं हो सकती तथा रुहानी व सच्ची स्तर के लिए भी शिक्षा अवश्य है। 

 

शिक्षा पैगम्बरों की विरासत तथा इन का सन्देश है।  शिक्षा एक ऐसी क्रान्ति है जिस के द्वारा सदस्य व समुदाय का भाग्य संवरता है।  शिक्षा के कारण से शिष्टाचार व सामाजिक विकास का अस्तित्व है। 

 

इस के द्वारा स्थिति प्रसन्न होती है।  भावना व अनुभूति पवित्र होते हैं था स्वभाव निश्चल होता है।  उसी के प्रभाव से राक्षसी शक्तियां, शैतानी प्रतिभा तथा शैतानी सोंच-विचार निवारण व अंत होते हैं। 

 

इसलाम धर्म ने धार्मिक तथा सांसारिक सर्व प्रकार के ज्ञान प्राप्त करने कि यथासम्भव अनुदेश किया है।  इसलाम ज्ञान कि राह में किसी एक स्थान पर रुक रहने कि आज्ञा नहीं देता बल्कि पल भर में अभिवृद्धि चाहने का आदेश देता है। 

 

अर्थात अल्लाह तआ़ला ने ज्ञान में समाविष्ट उन्नति अधिक कि दुआ करने का आदेश दियाः-

 

भाषांतरः और आप कहे दिजीएः ऐ मेरे रब!  मेरे ज्ञान में अभिवृद्धि प्रदान कर। 

 

(सुरह ताहाः 20:114)





 
 
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